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सरस्वती वंदना — "या कुन्देन्दु" श्लोक और "जय सरस्वती माता" आरती (अर्थ सहित)

विद्या की देवी माँ सरस्वती की प्रसिद्ध वंदना "या कुन्देन्दु…", "जय सरस्वती माता" आरती के पूरे बोल और सरल अर्थ।

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इस लेख में
  1. सरस्वती वंदना (संस्कृत श्लोक)
  2. जय सरस्वती माता — आरती
  3. कैसे गाएँ / पढ़ें
  4. अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माँ सरस्वती विद्या, बुद्धि, वाणी, संगीत और कला की देवी हैं। स्कूल की प्रार्थना सभा हो, परीक्षा से पहले का दिन हो या वसंत पंचमी की पूजा, "या कुन्देन्दुतुषारहारधवला…" की पंक्तियाँ सुनते ही मन शांत और साफ़ हो जाता है।

इस पेज पर पहले संस्कृत की दो प्रसिद्ध वंदना-श्लोक हैं, फिर घरों में गाई जाने वाली हिंदी आरती "जय सरस्वती माता"। दोनों के साथ सरल अर्थ भी दिया है, ताकि बच्चे समझकर गा सकें।

सरस्वती वंदना (संस्कृत श्लोक)

ये श्लोक पीढ़ियों से चली आ रही परंपरागत सरस्वती स्तुति का हिस्सा हैं। पहला श्लोक सबसे ज़्यादा गाया जाता है; कई जगह दोनों साथ पढ़े जाते हैं।

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृताया वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।या ब्रह्माच्युतशंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दितासा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥
शुक्लां ब्रह्मविचारसारपरमामाद्यां जगद्व्यापिनींवीणापुस्तकधारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्।हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थितांवन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥२॥

श्लोकों का सरल अर्थ

पहला श्लोक: जो देवी कुंद के फूल, चंद्रमा, बर्फ़ और मोतियों की माला जैसी उजली हैं, जिन्होंने सफ़ेद वस्त्र पहने हैं; जिनके हाथ सुंदर वीणा से सजे हैं और जो सफ़ेद कमल पर विराजती हैं; ब्रह्मा, विष्णु, शंकर जैसे देवता भी जिनकी सदा वंदना करते हैं, वे भगवती सरस्वती मेरी रक्षा करें और मेरी हर तरह की जड़ता (आलस, मंदबुद्धि, अज्ञान) को पूरी तरह दूर करें।

दूसरा श्लोक: जो उजले रूप वाली हैं, ब्रह्म-ज्ञान का सार हैं, सबसे पहली (आदि) शक्ति हैं और पूरे जगत में व्याप्त हैं; जो वीणा और पुस्तक धारण करती हैं, अभय देती हैं और अज्ञान के अंधेरे को मिटाती हैं; जिनके हाथ में स्फटिक की माला है और जो कमल के आसन पर बैठी हैं, उन बुद्धि देने वाली परमेश्वरी भगवती शारदा को मैं प्रणाम करता हूँ।

"जाड्य" का अर्थ है जड़ता, यानी मन का भारीपन, आलस और समझ की कमी। माँ से यही माँगा गया है कि हमारा मन जागरूक और सीखने को तैयार रहे।

जय सरस्वती माता — आरती

जय सरस्वती माता, मैया जय सरस्वती माता।सदगुण वैभव शालिनी, त्रिभुवन विख्याता॥जय सरस्वती माता॥
चन्द्रवदनि पद्मासिनि, द्युति मंगलकारी।सोहे शुभ हंस सवारी, अतुल तेजधारी॥जय सरस्वती माता॥
बाएँ कर में वीणा, दाएँ कर माला।शीश मुकुट मणि सोहे, गल मोतियन माला॥जय सरस्वती माता॥
देवी शरण जो आए, उनका उद्धार किया।पैठी मंथरा दासी, रावण संहार किया॥जय सरस्वती माता॥
विद्या ज्ञान प्रदायिनि, ज्ञान प्रकाश भरो।मोह अज्ञान और तिमिर का, जग से नाश करो॥जय सरस्वती माता॥
धूप दीप फल मेवा, माँ स्वीकार करो।ज्ञानचक्षु दे माता, जग निस्तार करो॥जय सरस्वती माता॥
माँ सरस्वती की आरती, जो कोई जन गावे।हितकारी सुखकारी, ज्ञान भक्ति पावे॥जय सरस्वती माता॥

आरती का सरल अर्थ

टेक: हे सरस्वती माँ, आपकी जय हो। आप अच्छे गुणों के धन से भरी हैं और तीनों लोकों में प्रसिद्ध हैं।

पहला पद: आपका मुख चंद्रमा जैसा है, आप कमल पर बैठती हैं और आपकी चमक सबका मंगल करती है। आप सुंदर हंस पर सवार हैं और आपका तेज अनोखा है।

दूसरा पद: आपके बाएँ हाथ में वीणा और दाएँ हाथ में माला है। सिर पर मणियों वाला मुकुट और गले में मोतियों की माला शोभा देती है।

तीसरा पद: जो भी आपकी शरण आया, आपने उसका उद्धार किया। लोक-परंपरा के अनुसार आपने ही मंथरा दासी की बुद्धि में प्रवेश किया, जिससे श्रीराम वन गए और आगे चलकर रावण का अंत हुआ। यानी बड़ी भलाई के लिए वाणी और बुद्धि को सही दिशा देना भी माँ की ही लीला मानी गई।

चौथा पद: हे विद्या और ज्ञान देने वाली माँ, हमारे भीतर ज्ञान का प्रकाश भर दो और दुनिया से मोह, अज्ञान और अंधेरे को मिटा दो।

पाँचवाँ पद: हे माँ, हमारी धूप, दीप, फल और मेवा स्वीकार करो। हमें समझ की आँख (ज्ञानचक्षु) दो और संसार का कल्याण करो।

अंतिम पद: जो भी माँ सरस्वती की यह आरती गाता है, उसे भलाई, सुख, ज्ञान और भक्ति मिलती है।

कैसे गाएँ / पढ़ें

  1. वसंत पंचमी, परीक्षा से पहले, नई पढ़ाई या संगीत सीखने की शुरुआत पर, या रोज़ सुबह पढ़ाई से पहले इसे गाया जा सकता है।
  2. माँ सरस्वती का चित्र रखें, पास में अपनी किताबें, कलम या वाद्य रखें। सफ़ेद या पीले फूल चढ़ाना परंपरा में शुभ माना जाता है।
  3. दीपक जलाकर पहले "या कुन्देन्दु…" श्लोक हाथ जोड़कर पढ़ें, फिर आरती की थाली घुमाते हुए "जय सरस्वती माता" गाएँ।
  4. संस्कृत श्लोक लंबे शब्दों वाले हैं। बच्चों को पहले छोटे टुकड़ों में सिखाएँ: "या कुन्देन्दु / तुषार / हार / धवला"।

माँ सरस्वती की असली पूजा है मन लगाकर पढ़ना, सीखना और अपनी वाणी को मीठा रखना। आरती उस संकल्प को रोज़ याद दिलाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

माँ सरस्वती हंस पर क्यों बैठती हैं?

परंपरा में हंस को विवेक का प्रतीक माना गया है। कहावत है कि हंस दूध और पानी को अलग कर देता है। उसी तरह ज्ञान हमें सही और गलत को अलग पहचानना सिखाता है।

सफ़ेद रंग का क्या अर्थ है?

सफ़ेद रंग पवित्रता, शांति और साफ़ मन का प्रतीक है। ज्ञान भी तभी टिकता है जब मन शांत और निर्मल हो।

आगे पढ़ें: गायत्री मंत्र — शब्दार्थ, सरल भावार्थ और जप की विधि, शांति मंत्र — सह नाववतु, असतो मा सद्गमय, पूर्णमदः और अन्य (अर्थ सहित), सनातन ग्रंथों का परिचय — वेद से पुराण तक, शुरुआत कहाँ से करें, नवदुर्गा और देवी के रूप

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