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ॐ जय लक्ष्मी माता — लक्ष्मी जी की आरती (पूरे बोल और अर्थ)

माँ लक्ष्मी की प्रसिद्ध आरती "ॐ जय लक्ष्मी माता" के पूरे बोल, हर पद का सरल अर्थ और दीपावली पूजा में इसे गाने का तरीका।

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इस लेख में
  1. आरती के पूरे बोल
  2. सरल अर्थ
  3. दीपावली पूजा में यह आरती
  4. आरती कैसे करें
  5. ध्यान रखने योग्य बातें

"ॐ जय लक्ष्मी माता" माँ लक्ष्मी की सबसे प्रसिद्ध आरती है। दीपावली की रात लक्ष्मी पूजा के बाद लगभग हर घर में यही आरती गूँजती है। शुक्रवार की पूजा, धनतेरस और शरद पूर्णिमा पर भी इसे गाया जाता है।

माँ लक्ष्मी भगवान विष्णु की शक्ति हैं, जो समुद्र मंथन से प्रकट हुईं। वे सिर्फ़ धन की नहीं, बल्कि सौभाग्य, अन्न, सुंदरता, शांति और अच्छे गुणों की देवी हैं। यह आरती इसी बड़े अर्थ को सरल शब्दों में गाती है। इस वर्ष की तिथि और मुहूर्त के लिए देखें: दीपावली 2026 — तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और पाँच दिन का पूरा कैलेंडर।

आरती के पूरे बोल

ॐ जय लक्ष्मी माता, मैया जय लक्ष्मी माता।तुमको निशिदिन सेवत, हरि विष्णु विधाता॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥
उमा, रमा, ब्रह्माणी, तुम ही जग-माता, मैया तुम ही जग-माता।सूर्य-चन्द्रमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥
दुर्गा रूप निरंजनि, सुख सम्पत्ति दाता, मैया सुख सम्पत्ति दाता।जो कोई तुमको ध्यावत, ऋद्धि-सिद्धि धन पाता॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम पाताल-निवासिनि, तुम ही शुभदाता, मैया तुम ही शुभदाता।कर्म-प्रभाव-प्रकाशिनि, भवनिधि की त्राता॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥
जिस घर में तुम रहतीं, सब सद्गुण आता, मैया सब सद्गुण आता।सब सम्भव हो जाता, मन नहीं घबराता॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥
तुम बिन यज्ञ न होते, वस्त्र न कोई पाता, मैया वस्त्र न कोई पाता।खान-पान का वैभव, सब तुमसे आता॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥
शुभ-गुण मन्दिर सुन्दर, क्षीरोदधि-जाता, मैया क्षीरोदधि-जाता।रत्न चतुर्दश तुम बिन, कोई नहीं पाता॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥
महालक्ष्मीजी की आरती, जो कोई जन गाता, मैया जो कोई जन गाता।उर आनन्द समाता, पाप उतर जाता॥ॐ जय लक्ष्मी माता॥

पाठभेद: पहले पद की दूसरी पंक्ति कई पुस्तकों में "तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता" मिलती है, यानी शिव (हर), विष्णु और ब्रह्मा (विधाता) तीनों आपकी सेवा करते हैं।

सरल अर्थ

पहला पद: हे माँ लक्ष्मी, आपकी जय हो। भगवान विष्णु भी और सृष्टि रचने वाले ब्रह्मा जी भी दिन-रात आपका आदर करते हैं।

दूसरा पद: पार्वती (उमा), लक्ष्मी (रमा) और सरस्वती (ब्रह्माणी), ये सब आपके ही रूप हैं; आप पूरे जगत की माँ हैं। सूरज और चाँद आपका ध्यान करते हैं और नारद मुनि आपका गुणगान करते हैं।

तीसरा पद: आप ही निर्मल दुर्गा रूप भी हैं, जो सुख और समृद्धि देती हैं। जो आपको सच्चे मन से याद करता है, उसके काम बनते हैं और घर में बरकत आती है।

चौथा पद: आप धरती के नीचे छिपे ख़ज़ानों में भी बसती हैं और हर शुभ चीज़ देती हैं। आप मनुष्य के कर्मों का फल प्रकट करती हैं और संसार रूपी समुद्र से पार लगाती हैं। यानी सच्ची लक्ष्मी मेहनत और अच्छे कर्म से जुड़ी है।

पाँचवाँ पद: जिस घर में आप निवास करती हैं, वहाँ अच्छे गुण अपने आप आते हैं। वहाँ कठिन काम भी संभव लगते हैं और मन डर या घबराहट से भरा नहीं रहता।

छठा पद: आपकी कृपा के बिना न यज्ञ-अनुष्ठान हो पाते, न किसी को कपड़ा मिलता। खाने-पीने की हर सुख-सुविधा आपसे ही आती है।

सातवाँ पद: आप शुभ गुणों का सुंदर मंदिर हैं और क्षीर सागर (दूध के समुद्र) से प्रकट हुई हैं। समुद्र मंथन से निकले चौदह रत्न भी आपकी कृपा के बिना किसी को नहीं मिलते। पूरी कथा पढ़ें: समुद्र मंथन की कथा — चौदह रत्न, माँ लक्ष्मी और नीलकंठ महादेव।

आठवाँ पद: जो भी व्यक्ति प्रेम से महालक्ष्मी जी की यह आरती गाता है, उसके हृदय में आनंद भर जाता है और मन का बोझ उतर जाता है।

दीपावली पूजा में यह आरती

दीपावली की शाम पूजा का सामान्य क्रम इस तरह रहता है: पहले गणेश जी का स्मरण, फिर लक्ष्मी जी का पूजन, फिर भोग, और अंत में आरती। बहुत से घरों में पहले गणेश जी की आरती, फिर यह लक्ष्मी आरती और अंत में ओम जय जगदीश हरे — आरती (पूरे बोल और अर्थ) गाई जाती है। पूरा तरीका यहाँ है: दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि — सामग्री सूची और आसान स्टेप-बाय-स्टेप तरीका। पूजा के मंत्र अर्थ सहित: दिवाली पूजा के मंत्र — लक्ष्मी-गणेश मंत्र अर्थ सहित।

आरती कैसे करें

दीपावली पर घी के दीपक से आरती करने का विशेष चलन है, और पूजा स्थल पर एक दीपक रात भर जलाए रखने की परंपरा भी कई घरों में है।

  • थाली में घी या तेल का दीपक (एक बत्ती या पाँच बत्ती, जैसा आपके घर में चलन हो), थोड़ा कपूर, फूल, अक्षत और जल रख लें।
  • साफ़ जगह पर बैठें या खड़े हों। बहुत से घरों में पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके पूजा करने का चलन है; अपने घर की परंपरा मानें।
  • थाली को घड़ी की सुई की दिशा में (दाहिनी ओर से) धीरे-धीरे घुमाएँ। एक प्रचलित तरीका है: चरणों के सामने चार बार, नाभि के सामने दो बार, मुख के सामने एक बार और फिर पूरे विग्रह के सामने सात बार। अलग-अलग परंपराओं में यह संख्या अलग हो सकती है, इसलिए इसे नियम नहीं, सहायक मार्गदर्शन समझें।
  • घंटी, शंख या ताली के साथ पूरा परिवार मिलकर गाए तो आरती का आनंद कई गुना हो जाता है।
  • आरती के बाद थाली सबके सामने ले जाएँ। दोनों हथेलियाँ दीपक की लौ के ऊपर घुमाकर आँखों और सिर से लगाएँ।

दीपक जलाते समय दुपट्टे, पर्दे और बच्चों का ध्यान रखें; आरती का भाव सबसे बड़ा है, दिखावा नहीं।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • लक्ष्मी जी की आरती में साफ़-सफ़ाई और प्रसन्न मन को सबसे ज़रूरी माना गया है; घर साफ़ हो और झगड़ा-क्लेश न हो।
  • "लक्ष्मी" का अर्थ सिर्फ़ पैसा नहीं है। ईमानदारी से कमाया धन, अच्छा स्वास्थ्य और परिवार का प्रेम भी लक्ष्मी ही है।
  • आरती के बाद प्रसाद बाँटें; बाँटने से ही लक्ष्मी बढ़ती है, यही इस पर्व का भाव है।

आगे पढ़ें: माँ लक्ष्मी — परिचय, स्वरूप का अर्थ, अष्टलक्ष्मी, कथाएँ और मंदिर, दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि — सामग्री सूची और आसान स्टेप-बाय-स्टेप तरीका, दीपावली 2026 — तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और पाँच दिन का पूरा कैलेंडर, समुद्र मंथन की कथा — चौदह रत्न, माँ लक्ष्मी और नीलकंठ महादेव, ओम जय जगदीश हरे — आरती (पूरे बोल और अर्थ)

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