आरती कीजै हनुमान लला की — हनुमान जी की आरती (पूरे बोल और अर्थ)
हनुमान जी की प्रसिद्ध आरती "आरती कीजै हनुमान लला की" के पूरे बोल, हर पंक्ति का सरल अर्थ और आरती करने का तरीका।
"आरती कीजै हनुमान लला की" हनुमान जी की सबसे लोकप्रिय आरती है। मंगलवार और शनिवार को, हनुमान जयंती पर और हनुमान चालीसा के पाठ के बाद यह आरती गाई जाती है। "लला" प्यार से बच्चे को कहा जाता है; भक्त हनुमान जी को उतने ही प्यार से पुकारते हैं जितना माँ अपने बेटे को।
इस आरती में रामायण की पूरी कहानी छोटे-छोटे दृश्यों में आ जाती है: सीता जी की खोज, लंका दहन, संजीवनी और अहिरावण से राम-लक्ष्मण को छुड़ाना। अंत के पद में तुलसीदास जी का नाम आता है, इसलिए इसे उनसे जोड़ा जाता है।
आरती के पूरे बोल
कुछ पुस्तकों में अंतिम दो पदों का क्रम बदला हुआ मिलता है, और कुछ घरों में "लंक विध्वंस…" वाला पद नहीं गाया जाता। दोनों रूप प्रचलित हैं।
सरल अर्थ
टेक: आइए, प्यारे हनुमान जी की आरती करें, जो दुष्टों का नाश करते हैं और श्रीराम की शक्ति का ही एक रूप हैं।
बल और कृपा: जिनकी ताकत से बड़े-बड़े पर्वत भी काँप जाते हैं, और जिनके पास रोग और बुराइयाँ झाँक भी नहीं पातीं। अंजनी माँ के पुत्र बहुत बल देने वाले हैं और सज्जनों की हमेशा मदद करते हैं।
सीता जी की खोज: श्रीराम ने उन्हें पान का बीड़ा देकर (यानी बड़ा काम सौंपकर) भेजा, और वे लंका जलाकर सीता माता का समाचार ले आए। लंका जैसा मज़बूत किला और उसके चारों ओर समुद्र जैसी गहरी खाई थी, फिर भी पवनपुत्र को वहाँ पहुँचने में ज़रा देर नहीं लगी।
लंका दहन: उन्होंने लंका जलाई, राक्षसों का संहार किया और सीता-राम जी के काम पूरे किए।
संजीवनी: युद्ध में लक्ष्मण जी मूर्छित पड़े थे; हनुमान जी सुबह होने से पहले संजीवनी बूटी लाए और उनके प्राण बचा लिए। (यहाँ "सकारे" का भाव है कि भोर से पहले ही काम पूरा करना था।)
अहिरावण वध: पाताल लोक में घुसकर उन्होंने यमराज जैसे भयानक पहरे तोड़े और अहिरावण की भुजाएँ उखाड़ दीं, जो राम-लक्ष्मण को उठा ले गया था। यह कथा लोक-रामायणों में प्रसिद्ध है।
दोनों भुजाएँ: बाईं भुजा से वे दुष्टों की सेना को हराते हैं और दाहिनी भुजा से सज्जनों को पार लगाते हैं। यानी उनकी शक्ति सिर्फ़ लड़ने के लिए नहीं, बचाने के लिए भी है।
सब करते हैं आरती: देवता, मनुष्य और ऋषि-मुनि उनकी आरती उतारते हैं और "जय जय जय हनुमान" का जयकारा लगाते हैं। सोने की थाली में कपूर की लौ जगमगा रही है और स्वयं माता अंजना अपने लाल की आरती कर रही हैं। यह दृश्य माँ-बेटे के प्रेम से भरा है।
फल: जो हनुमान जी की यह आरती गाता है, उसे भगवान के धाम में परम स्थान मिलता है, ऐसा भक्ति-परंपरा में कहा गया है।
अंतिम पद: श्रीराम ने लंका पर विजय पाई, और तुलसीदास ने प्रभु का यह यश गाया।
आरती कैसे करें
हनुमान जी की पूजा में बहुत से घरों में पहले हनुमान चालीसा — पूरा पाठ और सरल अर्थ का पाठ और फिर यह आरती होती है। सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और गुड़-चना उन्हें प्रिय माने जाते हैं; पर सच्चा भाव सबसे बड़ी भेंट है।
- थाली में घी या तेल का दीपक (एक बत्ती या पाँच बत्ती, जैसा आपके घर में चलन हो), थोड़ा कपूर, फूल, अक्षत और जल रख लें।
- साफ़ जगह पर बैठें या खड़े हों। बहुत से घरों में पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके पूजा करने का चलन है; अपने घर की परंपरा मानें।
- थाली को घड़ी की सुई की दिशा में (दाहिनी ओर से) धीरे-धीरे घुमाएँ। एक प्रचलित तरीका है: चरणों के सामने चार बार, नाभि के सामने दो बार, मुख के सामने एक बार और फिर पूरे विग्रह के सामने सात बार। अलग-अलग परंपराओं में यह संख्या अलग हो सकती है, इसलिए इसे नियम नहीं, सहायक मार्गदर्शन समझें।
- घंटी, शंख या ताली के साथ पूरा परिवार मिलकर गाए तो आरती का आनंद कई गुना हो जाता है।
- आरती के बाद थाली सबके सामने ले जाएँ। दोनों हथेलियाँ दीपक की लौ के ऊपर घुमाकर आँखों और सिर से लगाएँ।
दीपक जलाते समय दुपट्टे, पर्दे और बच्चों का ध्यान रखें; आरती का भाव सबसे बड़ा है, दिखावा नहीं।
ध्यान रखने योग्य बातें
- आरती के अंत में "बोलो सियावर रामचंद्र की जय, पवनसुत हनुमान की जय" का जयकारा लगाने का चलन है।
- बच्चों को यह आरती कहानी के साथ सिखाएँ: हर पंक्ति रामायण का एक दृश्य है। पूरी कथा पढ़ें: हनुमान जी — परिचय, नाम, स्वरूप का अर्थ, कथाएँ और प्रसिद्ध मंदिर, श्रीराम की अयोध्या वापसी — दीपावली की कथा।
आगे पढ़ें: हनुमान चालीसा — पूरा पाठ और सरल अर्थ, हनुमान जी — परिचय, नाम, स्वरूप का अर्थ, कथाएँ और प्रसिद्ध मंदिर, श्रीराम की अयोध्या वापसी — दीपावली की कथा, ॐ जय शिव ओंकारा — शिव जी की आरती (पूरे बोल और अर्थ)