हनुमान चालीसा — पूरा पाठ और सरल अर्थ
गोस्वामी तुलसीदास रचित पूरी हनुमान चालीसा (दोहे, 40 चौपाइयाँ और अंतिम दोहा), हर चौपाई का सरल अर्थ और पाठ करने का आसान तरीका।
इस लेख में
हनुमान चालीसा भारत में सबसे ज़्यादा पढ़ा जाने वाला भक्ति-पाठ है। इसकी रचना गोस्वामी तुलसीदास ने अवधी भाषा में की थी, वही संत जिन्होंने श्रीरामचरितमानस लिखा। "चालीसा" का अर्थ है चालीस चौपाइयों का संग्रह। शुरुआत में दो दोहे हैं और अंत में एक दोहा।
बहुत से लोग इसे रोज़ सुबह या शाम पढ़ते हैं, और मंगलवार-शनिवार को विशेष रूप से। इसे पढ़ने में लगभग 8 से 10 मिनट लगते हैं।
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प्रारंभिक दोहे
अर्थ: गुरु के कमल जैसे चरणों की धूल से अपने मन रूपी दर्पण को साफ़ करके मैं श्रीराम के निर्मल यश का वर्णन करता हूँ, जो धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष, चारों फल देने वाला है। अपने को बुद्धि में कमज़ोर जानकर मैं पवनपुत्र हनुमान को याद करता हूँ। हे हनुमान, मुझे बल, बुद्धि और विद्या दीजिए, और मेरे दुख तथा मन के दोष दूर कीजिए।
चौपाई 1 से 10
अर्थ: हे हनुमान, आप ज्ञान और गुणों के समुद्र हैं, वानरों के राजा हैं और तीनों लोकों में आपकी कीर्ति फैली है। आप श्रीराम के दूत हैं, अपार बल के भंडार हैं, और अंजनी के पुत्र तथा पवनपुत्र कहलाते हैं।
अर्थ: आप महावीर हैं, पराक्रमी हैं, आपका शरीर वज्र जैसा मज़बूत है (बजरंगी)। आप बुरी सोच को दूर करते हैं और अच्छी सोच वालों के साथी हैं। आपका रंग सोने जैसा है, सुंदर वेश है, कानों में कुंडल और बाल घुँघराले हैं।
अर्थ: आपके हाथ में वज्र (गदा) और ध्वजा है, कंधे पर मूँज का जनेऊ है। आप शंकर जी के अंश माने जाते हैं और वानरराज केसरी के पुत्र हैं; आपके तेज और प्रताप की पूरा संसार वंदना करता है।
अर्थ: आप विद्वान, गुणवान और बहुत समझदार हैं, और श्रीराम का काम करने को हमेशा उत्सुक रहते हैं। प्रभु की कथा सुनने में आपको आनंद आता है, और राम, लक्ष्मण तथा सीता आपके मन में बसते हैं।
अर्थ: आपने छोटा रूप धरकर अशोक वाटिका में सीता जी को दर्शन दिए, और विशाल रूप धरकर लंका जलाई। भयंकर रूप धरकर राक्षसों का नाश किया और श्रीराम के सारे काम पूरे किए।
चौपाई 11 से 20
अर्थ: आपने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण जी के प्राण बचाए, तो श्रीराम ने प्रसन्न होकर आपको गले लगा लिया। उन्होंने आपकी बहुत प्रशंसा की और कहा: तुम मुझे भरत जैसे ही प्यारे भाई हो।
अर्थ: "हज़ार मुख वाले शेषनाग भी तुम्हारा यश गाते हैं", ऐसा कहकर श्रीराम ने आपको फिर गले लगाया। सनक आदि ऋषि, ब्रह्मा आदि देवता, बड़े-बड़े मुनि, नारद, सरस्वती और नागराज शेष भी आपका गुण गाते हैं।
अर्थ: यमराज, कुबेर और दिशाओं के रक्षक देवता भी आपकी महिमा पूरी नहीं कह सकते, तो साधारण कवि और विद्वान कैसे कहेंगे? आपने सुग्रीव पर बड़ा उपकार किया: उन्हें श्रीराम से मिलवाया और उन्हें राज्य वापस मिला।
अर्थ: विभीषण ने आपकी सलाह मानी और वे लंका के राजा बने, यह सारा संसार जानता है। बचपन में आपने बहुत दूर स्थित सूर्य को मीठा फल समझकर मुँह में रख लिया था। (यहाँ कवि सूर्य की अपार दूरी बताकर हनुमान जी की शक्ति दिखा रहे हैं।)
अर्थ: प्रभु श्रीराम की अँगूठी मुँह में रखकर आपने समुद्र पार कर लिया, आपके लिए इसमें कोई आश्चर्य नहीं। संसार में जितने भी कठिन काम हैं, आपकी कृपा से वे सब आसान हो जाते हैं।
चौपाई 21 से 30
अर्थ: आप श्रीराम के द्वार के रक्षक हैं; आपकी अनुमति के बिना वहाँ कोई प्रवेश नहीं कर सकता। जो आपकी शरण में आता है, उसे सुख मिलता है; जब आप रक्षक हैं, तो किसी से डरने की ज़रूरत नहीं।
अर्थ: अपने तेज को आप ही सँभाल सकते हैं; आपकी एक हुंकार से तीनों लोक काँप उठते हैं। जो महावीर का नाम लेता है, उसके पास कोई भी बुरी शक्ति नहीं फटकती। (भक्त के लिए इसका सबसे सुंदर अर्थ है: हनुमान जी का नाम मन से डर भगा देता है।)
अर्थ: वीर हनुमान का लगातार स्मरण करने से रोग और पीड़ा का बल घटता है, ऐसा भक्तों का विश्वास है। जो मन, कर्म और वचन से हनुमान जी का ध्यान करता है, उसे वे संकट से निकाल लेते हैं।
अर्थ: तपस्वी राजा श्रीराम सबसे श्रेष्ठ हैं, और उनके सारे काम आपने ही सँवारे। जो भी आपके पास कोई और इच्छा लेकर आता है, उसे जीवन का भरपूर फल मिलता है।
अर्थ: चारों युगों में आपका प्रताप फैला है और आपकी कीर्ति से संसार में उजाला है। आप साधु-संतों के रक्षक हैं, दुष्टों का नाश करने वाले हैं और श्रीराम के बहुत प्यारे हैं।
चौपाई 31 से 40
अर्थ: माता सीता ने आपको वरदान दिया कि आप आठों सिद्धियाँ और नौ निधियाँ देने वाले होंगे। राम-भक्ति रूपी अमृत आपके पास है; आप सदा श्रीराम के सेवक बने रहें।
अर्थ: आपका भजन करने से श्रीराम मिलते हैं और जन्म-जन्म के दुख भूल जाते हैं। ऐसा भक्त अंत समय में श्रीराम के धाम जाता है, और यदि फिर जन्म ले तो भगवान का भक्त ही कहलाता है।
अर्थ: मन में और किसी का ध्यान न भी करे, तो भी हनुमान जी की सेवा से सब सुख मिलते हैं। जो बलवान वीर हनुमान को याद करता है, उसके संकट कटते हैं और पीड़ा मिटती है। (यह भक्त का अपने इष्ट के प्रति प्रेम है, दूसरे देवताओं का अनादर नहीं।)
अर्थ: हे स्वामी हनुमान, आपकी जय हो, जय हो, जय हो! जैसे गुरु शिष्य पर कृपा करते हैं, वैसे ही मुझ पर कृपा कीजिए। जो इसका सौ बार पाठ करता है, वह बंधनों से छूटकर महान सुख पाता है।
अर्थ: जो यह हनुमान चालीसा पढ़ता है, उसका पाठ सफल होता है; इसके साक्षी स्वयं शिव जी (गौरी के पति) हैं। तुलसीदास कहते हैं: मैं सदा प्रभु का सेवक हूँ; हे नाथ, मेरे हृदय में निवास कीजिए।
अंतिम दोहा
अर्थ: हे पवनपुत्र, आप संकट हरने वाले और मंगल की मूर्ति हैं। हे देवताओं के राजा, आप श्रीराम, लक्ष्मण और सीता जी के साथ मेरे हृदय में बसिए।
पाठ कैसे करें
- सुबह स्नान के बाद या शाम को दीपक जलाकर, शांत जगह पर बैठकर पाठ करें। हनुमान जी या श्रीराम दरबार का चित्र सामने हो तो अच्छा, न हो तो भी मन से याद करना काफ़ी है।
- बहुत से लोग पाठ से पहले "श्रीराम जय राम जय जय राम" बोलते हैं, क्योंकि हनुमान जी राम-नाम से सबसे ज़्यादा प्रसन्न माने जाते हैं।
- एक बार, तीन बार, सात बार या ग्यारह बार, जितना समय हो उतना पढ़ें। संख्या की परंपराएँ अलग-अलग हैं; रोज़ का एक पाठ भी मन लगाकर हो तो सुंदर है।
- पाठ के बाद हनुमान जी की आरती गाई जा सकती है।
ध्यान रखने योग्य बातें
- शब्दों का उच्चारण धीरे-धीरे सीखें; ऑडियो के साथ पढ़ने से यह आसान हो जाता है।
- हनुमान चालीसा डर भगाने और मन को मज़बूत करने का साधन है। बीमारी में डॉक्टर की सलाह और मेहनत के साथ प्रार्थना करें, उनकी जगह नहीं।
- कुछ पुस्तकों में छोटे-मोटे पाठभेद मिलते हैं (जैसे "संकर सुवन" की जगह "संकर स्वयं"); ये सब प्रचलित हैं।
आगे पढ़ें: हनुमान जी — परिचय, नाम, स्वरूप का अर्थ, कथाएँ और प्रसिद्ध मंदिर, आरती कीजै हनुमान लला की — हनुमान जी की आरती (पूरे बोल और अर्थ), श्रीराम की अयोध्या वापसी — दीपावली की कथा, घर पर रोज़ की सरल पूजा विधि — 10-15 मिनट में, क्रम से