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दिवाली पूजा के मंत्र — लक्ष्मी-गणेश मंत्र अर्थ सहित

दिवाली की लक्ष्मी-गणेश पूजा में बोले जाने वाले प्रमुख मंत्र — शुद्ध बोल, शब्दों का अर्थ, सरल भावार्थ और पूजा में कब बोलें।

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इस लेख में
  1. 1. वक्रतुण्ड महाकाय — विघ्न दूर करने की प्रार्थना
  2. 2. ॐ गं गणपतये नमः — गणेश जी का बीज मंत्र
  3. 3. ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः — लक्ष्मी जी का बीज मंत्र
  4. 4. लक्ष्मी गायत्री मंत्र
  5. 5. या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता
  6. 6. दीप जलाते समय — शुभं करोति
  7. पूजा में मंत्रों का सरल क्रम
  8. ध्यान रखने योग्य बातें

दिवाली की रात घर-घर में भगवान गणेश और माँ लक्ष्मी की पूजा होती है। पूजा में कुछ छोटे-छोटे मंत्र बार-बार आते हैं। यहाँ वही मंत्र उनके अर्थ के साथ दिए गए हैं, ताकि आप समझकर, मन से बोल सकें। पूजा का पूरा क्रम दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि — सामग्री सूची और आसान स्टेप-बाय-स्टेप तरीका में और त्योहार की तिथि-जानकारी दीपावली 2026 — तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और पाँच दिन का पूरा कैलेंडर में पढ़ें।

परंपरा है कि किसी भी पूजा में सबसे पहले गणेश जी का स्मरण होता है, फिर लक्ष्मी जी का पूजन।

1. वक्रतुण्ड महाकाय — विघ्न दूर करने की प्रार्थना

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ।निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

शब्दार्थ: वक्रतुण्ड — मुड़ी हुई सूँड़ वाले; महाकाय — विशाल शरीर वाले; सूर्यकोटि — करोड़ों सूर्यों के; समप्रभ — समान तेज वाले; निर्विघ्नम् — बिना बाधा के; कुरु — करो; मे — मेरे; देव — हे देव; सर्वकार्येषु — सभी कामों में; सर्वदा — हमेशा।

भावार्थ: हे मुड़ी हुई सूँड़ और विशाल शरीर वाले गणेश जी, आपका तेज करोड़ों सूर्यों जैसा है। मेरे सभी कामों को हमेशा बिना किसी बाधा के पूरा कीजिए।

कब बोलें: पूजा शुरू करते समय, हाथ जोड़कर। यह परंपरा से चला आ रहा स्मरण-श्लोक है, जो हर शुभ काम की शुरुआत में बोला जाता है।

2. ॐ गं गणपतये नमः — गणेश जी का बीज मंत्र

ॐ गं गणपतये नमः॥

शब्दार्थ: ॐ — परमात्मा का पवित्र नाम; गं — गणेश जी का बीज अक्षर; गणपतये — गणों के स्वामी को; नमः — नमस्कार।

भावार्थ: गणों के स्वामी, भगवान गणपति को मेरा नमस्कार।

कब बोलें: गणेश जी को तिलक, फूल, दूर्वा या मोदक-लड्डू अर्पित करते समय। जप करना हो तो 11 या 108 बार। "गं" बीज का वर्णन गणपति अथर्वशीर्ष में मिलता है।

3. ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः — लक्ष्मी जी का बीज मंत्र

ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः॥

शब्दार्थ: श्रीं — लक्ष्मी जी का बीज अक्षर (श्री का अर्थ है शोभा, समृद्धि, मंगल); महालक्ष्म्यै — महालक्ष्मी को; नमः — नमस्कार।

भावार्थ: समृद्धि और मंगल की देवी, माँ महालक्ष्मी को मेरा नमस्कार।

कब बोलें: लक्ष्मी जी को कुमकुम, फूल, कमल, खील-बताशे या मिठाई चढ़ाते समय, और पूजा के बाद जप के रूप में (11, 21 या 108 बार)।

4. लक्ष्मी गायत्री मंत्र

ॐ महालक्ष्म्यै च विद्महेविष्णुपत्न्यै च धीमहि।तन्नो लक्ष्मीः प्रचोदयात्॥

शब्दार्थ: महालक्ष्म्यै — महालक्ष्मी को; विद्महे — हम जानते हैं, पहचानते हैं; विष्णुपत्न्यै — भगवान विष्णु की पत्नी का; धीमहि — हम ध्यान करते हैं; तत् — वे; नः — हमें; लक्ष्मीः — लक्ष्मी जी; प्रचोदयात् — प्रेरणा दें।

भावार्थ: हम महालक्ष्मी को जानते हैं और भगवान विष्णु की पत्नी के रूप में उनका ध्यान करते हैं। वे माँ लक्ष्मी हमें सही राह पर प्रेरित करें।

स्रोत और भाव: यह गायत्री छंद के ढंग पर बना मंत्र है और श्रीसूक्त के पाठ के अंत में भी बोला जाता है। ध्यान दीजिए, यहाँ भी माँ से "प्रेरणा" माँगी गई है — यानी धन के साथ उसे सही ढंग से कमाने और बरतने की बुद्धि।

5. या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता

या देवी सर्वभूतेषु लक्ष्मीरूपेण संस्थिता।नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

शब्दार्थ: या — जो; देवी — देवी; सर्वभूतेषु — सभी प्राणियों में; लक्ष्मीरूपेण — लक्ष्मी (शोभा, समृद्धि) के रूप में; संस्थिता — स्थित हैं; नमस्तस्यै — उन्हें नमस्कार; नमो नमः — बार-बार नमस्कार।

भावार्थ: जो देवी सभी प्राणियों में लक्ष्मी, यानी शोभा और समृद्धि के रूप में बसी हैं, उन्हें नमस्कार है, नमस्कार है, बार-बार नमस्कार है।

स्रोत: यह दुर्गा सप्तशती (मार्कण्डेय पुराण) के पाँचवें अध्याय की देवी-स्तुति का एक श्लोक है। इसका सुंदर भाव यह है कि लक्ष्मी केवल तिजोरी में नहीं — हर जीव की शोभा, मेहनत और भलाई में बसती हैं।

6. दीप जलाते समय — शुभं करोति

दिवाली दीपों का त्योहार है, इसलिए दीप जलाते समय यह पारंपरिक श्लोक भी बहुत घरों में बोला जाता है:

शुभं करोति कल्याणमारोग्यं धनसम्पदा।शत्रुबुद्धिविनाशाय दीपज्योतिर्नमोऽस्तु ते॥

भावार्थ: जो शुभ करती है, कल्याण, आरोग्य और धन-संपदा देती है, और मन की शत्रुता (बुरे विचारों) को मिटाती है — उस दीप-ज्योति को नमस्कार है।

पूजा में मंत्रों का सरल क्रम

  1. दीप जलाते समय — शुभं करोति।
  2. पूजा आरंभ — वक्रतुण्ड महाकाय।
  3. गणेश पूजन — ॐ गं गणपतये नमः।
  4. लक्ष्मी पूजन — ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।
  5. ध्यान — लक्ष्मी गायत्री और "या देवी सर्वभूतेषु"।
  6. अंत में — जय गणेश जय गणेश देवा — गणेश जी की आरती (पूरे बोल और अर्थ) और ॐ जय लक्ष्मी माता — लक्ष्मी जी की आरती (पूरे बोल और अर्थ)।

ध्यान रखने योग्य बातें

  • मंत्र धीरे और साफ़ बोलें; परिवार के साथ मिलकर बोलें तो बच्चे भी सीख जाते हैं।
  • जो मंत्र याद न हो, उसकी जगह "ॐ गणेशाय नमः" और "ॐ महालक्ष्म्यै नमः" बोलना भी पूरी श्रद्धा है।
  • कोई मंत्र धन की "गारंटी" नहीं है। परंपरा में लक्ष्मी जी वहाँ आती हैं जहाँ मेहनत, ईमानदारी, सफ़ाई और आपसी प्रेम हो।

आगे पढ़ें: दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि — सामग्री सूची और आसान स्टेप-बाय-स्टेप तरीका, दीपावली 2026 — तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और पाँच दिन का पूरा कैलेंडर, माँ लक्ष्मी — परिचय, स्वरूप का अर्थ, अष्टलक्ष्मी, कथाएँ और मंदिर, श्री गणेश — परिचय, नाम, स्वरूप का अर्थ, कथाएँ और प्रसिद्ध मंदिर, धनतेरस 2026 — 6 नवंबर: पूजा मुहूर्त, धन्वंतरि कथा, यम दीपदान और क्या ख़रीदें

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