दीपावली लक्ष्मी-गणेश पूजा विधि — सामग्री सूची और आसान स्टेप-बाय-स्टेप तरीका
घर पर दीपावली की लक्ष्मी-गणेश पूजा कैसे करें — पूरी सामग्री सूची, चौकी सजाने का तरीका और 12 आसान चरणों में पूजा विधि।
दीपावली की शाम की लक्ष्मी-गणेश पूजा घर की सबसे सुंदर पूजा होती है — पूरा परिवार एक साथ बैठता है, दीये जगमगाते हैं और मन में नए वर्ष की शुभकामना होती है। यह विधि ऐसी रखी गई है कि पहली बार पूजा करने वाला भी आराम से कर सके। 2026 में लक्ष्मी पूजा 8 नवंबर (रविवार) को है; दिल्ली में शुभ मुहूर्त शाम 5:54 से 7:50 तक है। दूसरे शहरों का समय दीपावली 2026 — तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और पाँच दिन का पूरा कैलेंडर में देखें।
पंडित जी से विस्तृत षोडशोपचार पूजा करवाना भी उत्तम है। यह सरल गृहस्थ विधि उनके लिए है जो स्वयं श्रद्धा से पूजा करना चाहते हैं।
पूजा सामग्री सूची
मुख्य
- लक्ष्मी जी और गणेश जी की नई मूर्ति या चित्र (दोनों को कैसे बिठाएँ, इसकी परंपरा घर-घर अलग है — अपने परिवार की रीति मानें)
- लकड़ी की चौकी और उस पर बिछाने के लिए लाल या पीला कपड़ा
- कलश (ताँबे/पीतल/मिट्टी का), आम के पत्ते, नारियल
- बड़ा घी का दीपक (अखंड दीप के लिए) और 11, 21 या जितने चाहें मिट्टी के दीये
पूजन के लिए
- रोली (कुमकुम), हल्दी, अक्षत (साबुत चावल), चंदन
- फूल, कमल का फूल (मिले तो), फूलमाला, दूर्वा
- धूप/अगरबत्ती, कपूर, रुई की बत्तियाँ, घी और तेल
- पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) या केवल गंगाजल/शुद्ध जल
- खील-बताशे, मिठाई, फल, पान के पत्ते, सुपारी, लौंग-इलायची
- कुछ सिक्के या चाँदी का सिक्का, बही-खाता/डायरी और कलम (व्यापारी परिवारों में)
चौकी कैसे सजाएँ
- पूजा का स्थान साफ़ करके गंगाजल छिड़कें। संभव हो तो चौकी इस तरह रखें कि पूजा करते समय आपका मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो।
- चौकी पर कपड़ा बिछाएँ, बीच में थोड़े चावल की ढेरी बनाकर लक्ष्मी-गणेश को विराजमान करें।
- चौकी के दाहिनी ओर (आपके हिसाब से) कलश रखें: उसमें जल, एक सिक्का, सुपारी और अक्षत डालें, मुँह पर आम के पत्ते और ऊपर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें।
- बड़ा घी का दीपक चौकी के पास रखें। सामने एक थाली में सारी सामग्री सजा लें।
पूजा विधि — 12 आसान चरण
- शुद्धि: स्नान करके साफ़ कपड़े पहनें। आसन पर बैठकर हाथ में जल लेकर अपने ऊपर और सामग्री पर छिड़कें और भगवान का नाम लें।
- दीप प्रज्वलन: बड़ा घी का दीपक जलाएँ। यह पूरी पूजा का साक्षी है।
- संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और फूल लेकर मन में या बोलकर कहें — "आज कार्तिक अमावस्या, दीपावली के दिन, मैं (अपना नाम) अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि के लिए श्री लक्ष्मी-गणेश का पूजन कर रहा/रही हूँ।" फिर जल नीचे छोड़ दें।
- गणेश पूजन: सबसे पहले गणेश जी का स्मरण करें — "वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥" उन्हें तिलक, अक्षत, दूर्वा, फूल और मोदक/लड्डू अर्पित करें।
- कलश पूजन: कलश पर रोली से स्वस्तिक बनाएँ, अक्षत और फूल चढ़ाएँ। कलश में सभी तीर्थों और देवताओं का वास माना जाता है।
- लक्ष्मी पूजन: माँ लक्ष्मी का ध्यान करें। जल (या पंचामृत) से प्रतीकात्मक स्नान कराएँ, फिर चंदन, रोली, अक्षत, कमल/लाल फूल, माला और श्रृंगार की वस्तुएँ अर्पित करें। "ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः" का 11 या 108 बार जप करें। मंत्र और अर्थ: दिवाली पूजा के मंत्र — लक्ष्मी-गणेश मंत्र अर्थ सहित
- कुबेर और सरस्वती पूजन: तिजोरी/धन रखने के स्थान पर स्वस्तिक बनाकर कुबेर जी को नमन करें। बही-खाते और कलम पर रोली-अक्षत चढ़ाकर माँ सरस्वती का पूजन करें।
- धूप-दीप: धूप और दीप दिखाएँ।
- नैवेद्य: खील-बताशे, मिठाई, फल, पान-सुपारी अर्पित करें। मन में भाव रखें कि जो कुछ है, वह उन्हीं का दिया है।
- आरती: परिवार के साथ पहले जय गणेश जय गणेश देवा — गणेश जी की आरती (पूरे बोल और अर्थ), फिर ॐ जय लक्ष्मी माता — लक्ष्मी जी की आरती (पूरे बोल और अर्थ) गाएँ। चाहें तो अंत में ओम जय जगदीश हरे — आरती (पूरे बोल और अर्थ)।
- पुष्पांजलि और क्षमा प्रार्थना: हाथ में फूल लेकर प्रणाम करें और कहें — "हे माँ, पूजा में जो भूल हुई हो, उसे क्षमा करें।"
- दीपदान: पूजा के दीपक से बाकी दीये जलाएँ और उन्हें घर के मंदिर, रसोई, तुलसी, पानी के स्थान, आँगन, छत और मुख्य द्वार पर रखें।
पूजा के बाद
- प्रसाद पहले घर के बड़ों और बच्चों को दें, फिर पड़ोसियों और घर में काम करने वालों के साथ बाँटें।
- कई परिवार अखंड दीप को रात भर जलने देते हैं। ऐसा करें तो उसे सुरक्षित जगह रखें और बीच-बीच में घी डालते रहें।
- अगले दिन मूर्ति को उसी स्थान पर रहने दें या घर के मंदिर में स्थापित करें।
ध्यान रखने योग्य बातें
- विधि से अधिक भाव महत्वपूर्ण है। कोई सामग्री न मिले तो उसके स्थान पर अक्षत या फूल चढ़ाकर मन से अर्पित करें।
- पुरानी मूर्ति को फेंकें नहीं; सम्मान से बहते जल या किसी पेड़ के नीचे मिट्टी में विसर्जित करें, या मंदिर में दे दें।
- दीयों और कपूर को बच्चों की पहुँच से दूर रखें।
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