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भाई दूज 2026 — 11 नवंबर: तिलक मुहूर्त, विधि और यम-यमुना की कथा

भाई दूज 2026 बुधवार 11 नवंबर को है। तिलक का शुभ समय (दोपहर 1:10 से 3:20, दिल्ली), थाली की सामग्री, विधि और यमराज-यमुना की प्यारी कथा।

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इस लेख में
  1. 2026 में तिथि और मुहूर्त (नई दिल्ली)
  2. भाई दूज की कथा — संक्षेप में
  3. तिलक की थाली में क्या रखें
  4. भाई दूज की विधि
  5. अलग-अलग क्षेत्रों में
  6. इस पर्व की सीख

दीपावली उत्सव का पाँचवाँ और अंतिम दिन है भाई दूज — भाई-बहन के स्नेह का पर्व। कार्तिक शुक्ल द्वितीया को बहनें भाई को तिलक करके उसकी लंबी आयु और सुख की कामना करती हैं, और भाई बहन की रक्षा और सम्मान का वचन देता है। इसे यम द्वितीया भी कहते हैं।

2026 में तिथि और मुहूर्त (नई दिल्ली)

  • भाई दूज: बुधवार, 11 नवंबर 2026
  • तिलक का शुभ समय (अपराह्न काल): दोपहर 1:10 से 3:20 तक
  • द्वितीया तिथि: 10 नवंबर दोपहर 2:00 से 11 नवंबर दोपहर 3:53 तक

(स्रोत: drikpanchang.com। कुछ परिवार द्वितीया लगते ही 10 नवंबर की शाम को भी मनाते हैं; अपनी परंपरा के अनुसार चलें।)

भाई दूज की कथा — संक्षेप में

सूर्यदेव की संतान यमराज और यमुना भाई-बहन थे। यमुना बार-बार भाई को अपने घर बुलाती, पर यमराज अपने काम में व्यस्त रहते। एक दिन — कार्तिक शुक्ल द्वितीया को — यमराज अचानक बहन के घर पहुँच गए। यमुना ने प्रसन्न होकर उन्हें तिलक लगाया, प्रेम से भोजन कराया। खुश होकर यमराज ने वर माँगने को कहा। यमुना ने माँगा — "हर वर्ष इस दिन आप मेरे घर आएँ, और जो भाई इस दिन बहन के घर जाकर उसका आदर-सत्कार स्वीकार करे, उसे अकाल मृत्यु का भय न हो।" यमराज ने "तथास्तु" कहा। पूरी कथा: यम और यमुना की कथा — भाई दूज क्यों मनाते हैं

तिलक की थाली में क्या रखें

  • रोली/कुमकुम, अक्षत (चावल), हल्दी
  • दीपक (घी का), मिठाई, सूखा नारियल (गोला), पान-सुपारी
  • कलावा (मौली), फूल, थोड़ा जल का लोटा
  • कई क्षेत्रों में बताशे, मखाने या मिश्री

भाई दूज की विधि

  1. बहन सुबह स्नान करके भाई के लिए भोजन बनाने की तैयारी करती है।
  2. शुभ समय में भाई को पूर्व या उत्तर की ओर मुख करके आसन/चौकी पर बिठाएँ। सिर पर रूमाल या कपड़ा रखें।
  3. बहन भाई के माथे पर रोली और अक्षत से तिलक करे, कलाई पर कलावा बाँधे।
  4. भाई के हाथ में नारियल का गोला, पान-सुपारी और फूल देकर दीपक से आरती उतारे।
  5. मिठाई खिलाकर भाई के सुख और दीर्घायु की प्रार्थना करे।
  6. भाई बहन के चरण छूकर (या बड़ी बहन हो तो आशीर्वाद लेकर) उपहार दे और जीवन भर साथ निभाने का वचन दे।
  7. परंपरा है कि भाई इस दिन बहन के घर भोजन करे।

जिनकी बहन नहीं है या दूर है, वे किसी बहन-समान स्त्री (चचेरी बहन, सखी) से तिलक करवा सकते हैं; और दूर रहने वाले वीडियो कॉल पर भी यह स्नेह निभा सकते हैं — भाव ही मुख्य है।

अलग-अलग क्षेत्रों में

  • महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक: भाऊबीज
  • बंगाल: भाई फोंटा — बहन भाई के माथे पर चंदन का टीका लगाती है।
  • नेपाल: भाई टीका — सात रंगों का टीका।
  • उत्तर भारत में इसी दिन कायस्थ समाज चित्रगुप्त पूजा करता है — कलम-दवात की पूजा।
  • मथुरा में भाई-बहन साथ में यमुना स्नान करते हैं।

इस पर्व की सीख

भाई दूज बताता है कि रिश्ते समय माँगते हैं — यमराज जैसे व्यस्त देवता को भी बहन के प्रेम के लिए समय निकालना पड़ा। आज की भागदौड़ में भी साल में कम से कम एक दिन परिवार के लिए पूरा निकालिए।

आगे पढ़ें: यम और यमुना की कथा — भाई दूज क्यों मनाते हैं, छठ महापर्व 2026 — 13 से 16 नवंबर: नहाय-खाय, खरना, संध्या और उषा अर्घ्य, दीपावली 2026 — तिथि, लक्ष्मी पूजा मुहूर्त और पाँच दिन का पूरा कैलेंडर

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