भगवान शिव — परिचय, स्वरूप का अर्थ, 12 ज्योतिर्लिंग और प्रसिद्ध मंदिर
महादेव शिव कौन हैं, उनके नाम, त्रिशूल-डमरू-नंदी जैसे प्रतीकों का अर्थ, मुख्य कथाएँ, 12 ज्योतिर्लिंग राज्य सहित और त्योहार।
इस लेख में
भगवान शिव को महादेव — देवों के देव — कहा जाता है। वे सबसे बड़े योगी भी हैं और सबसे सरल गृहस्थ भी; कैलाश पर्वत पर ध्यान में बैठे भी और माता पार्वती, गणेश और कार्तिकेय के साथ परिवार में भी। त्रिमूर्ति में ब्रह्मा सृष्टि करते हैं, विष्णु पालन करते हैं और शिव संहार करते हैं — पर यह संहार विनाश नहीं, पुराने को समेटकर नए के लिए जगह बनाना है। शैव परंपरा में शिव ही परम ब्रह्म हैं।
वे इतनी जल्दी प्रसन्न होते हैं कि उन्हें भोलेनाथ और आशुतोष (तुरंत संतुष्ट होने वाले) कहते हैं — एक लोटा जल और बेलपत्र से भी।
प्रमुख नाम
महादेव, शंकर, शिव, भोलेनाथ, रुद्र, महेश, नीलकंठ, गंगाधर, चंद्रशेखर, त्र्यंबक, पशुपति, विश्वनाथ, महाकाल, नटराज, उमापति, कैलाशपति और आशुतोष। वेदों में उनका रूप रुद्र के नाम से आता है; यजुर्वेद का श्रीरुद्रम् (रुद्राध्याय) उनकी प्राचीन स्तुति है।
स्वरूप और प्रतीकों का अर्थ
- जटाओं में गंगा — ज्ञान की धारा, जिसे संयम से धारण किया जाए तो वह संसार का कल्याण करती है।
- मस्तक पर चंद्रमा — मन की शीतलता; समय (कलाएँ) पर अधिकार।
- तीसरा नेत्र — ज्ञान और विवेक की आँख, जो काम (वासना) और अज्ञान को भस्म कर देती है।
- गले में नाग — भय और मृत्यु पर विजय; खतरनाक चीज़ भी उनके पास शांत हो जाती है।
- नीला कंठ — समुद्र मंथन का विष पीकर संसार को बचाया। सीख: दुनिया का कड़वापन गले में रोक लो, मन में मत उतरने दो। पढ़ें: समुद्र मंथन की कथा — चौदह रत्न, माँ लक्ष्मी और नीलकंठ महादेव।
- त्रिशूल — तीन गुण (सत्त्व, रज, तम) और तीन तरह के दुखों पर नियंत्रण।
- डमरू — नाद, यानी सृष्टि की पहली ध्वनि। परंपरा कहती है कि नटराज के डमरू से ही संस्कृत व्याकरण के चौदह "माहेश्वर सूत्र" निकले।
- भस्म — सब कुछ एक दिन राख होना है; इसलिए अहंकार न करो।
- रुद्राक्ष — "रुद्र के आँसू"; साधना और करुणा।
- बाघंबर — शक्ति और अहंकार पर विजय।
- नंदी (बैल) वाहन — धर्म, धैर्य और अटूट भक्ति। मंदिरों में नंदी हमेशा शिव की ओर मुख करके बैठे होते हैं — भक्त का ध्यान केवल प्रभु पर।
- शिवलिंग — निराकार, अनंत परमात्मा का प्रतीक, जिसका न आदि है न अंत।
प्रमुख कथाएँ (संक्षेप में)
- नीलकंठ — समुद्र मंथन से निकले हलाहल विष को शिव ने संसार की रक्षा के लिए पी लिया और उसे कंठ में ही रोक लिया, जिससे उनका कंठ नीला हो गया। (लोक-परंपरा में कहा जाता है कि माता पार्वती ने उनका कंठ थामकर विष को नीचे जाने से रोका।) विस्तार से: समुद्र मंथन की कथा — चौदह रत्न, माँ लक्ष्मी और नीलकंठ महादेव।
- लिंगोद्भव — शिव पुराण के अनुसार ब्रह्मा और विष्णु के बीच कौन बड़ा, इस विवाद में एक अनंत अग्नि-स्तंभ प्रकट हुआ, जिसका सिरा दोनों में से कोई न पा सका। यही ज्योतिर्लिंग का भाव है।
- गंगा-अवतरण — राजा भगीरथ की तपस्या पर गंगा स्वर्ग से उतरीं, और उनके वेग को शिव ने अपनी जटाओं में थामा (वाल्मीकि रामायण, बालकांड)।
- सती और पार्वती — दक्ष के यज्ञ में सती का देह-त्याग, और फिर हिमालय की पुत्री पार्वती का कठोर तप करके शिव को पाना। पढ़ें: माँ दुर्गा और नवदुर्गा — नौ रूप, नवरात्रि के नौ दिन, कथा और मंदिर।
- गणेश जन्म — पढ़ें: श्री गणेश — परिचय, नाम, स्वरूप का अर्थ, कथाएँ और प्रसिद्ध मंदिर।
- मार्कण्डेय की रक्षा — भक्त बालक के लिए यमराज को भी लौटना पड़ा; इसी से जुड़ा है महामृत्युंजय मंत्र — शब्दार्थ, भावार्थ और जप विधि।
12 ज्योतिर्लिंग (राज्य सहित)
परंपरा में बारह स्थान ऐसे माने गए हैं जहाँ शिव ज्योति के रूप में प्रकट हुए। "द्वादश ज्योतिर्लिंग स्तोत्र" के ये श्लोक बहुत घरों में बोले जाते हैं:
- सोमनाथ — प्रभास पाटन, गिर सोमनाथ ज़िला, गुजरात।
- मल्लिकार्जुन — श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश।
- महाकालेश्वर — उज्जैन, मध्य प्रदेश।
- ओंकारेश्वर — नर्मदा नदी के द्वीप पर, खंडवा ज़िला, मध्य प्रदेश।
- केदारनाथ — रुद्रप्रयाग ज़िला, हिमालय, उत्तराखंड।
- भीमाशंकर — पुणे ज़िला, सह्याद्रि पर्वत, महाराष्ट्र।
- काशी विश्वनाथ — वाराणसी, उत्तर प्रदेश।
- त्र्यंबकेश्वर — गोदावरी (गौतमी) के उद्गम के पास, नासिक, महाराष्ट्र।
- वैद्यनाथ (बैद्यनाथ धाम) — देवघर, झारखंड।
- नागेश्वर — द्वारका के पास, गुजरात।
- रामेश्वरम (रामनाथस्वामी) — रामनाथपुरम ज़िला, तमिलनाडु।
- घृष्णेश्वर — एलोरा के पास, छत्रपति संभाजीनगर (औरंगाबाद) ज़िला, महाराष्ट्र।
कुछ ज्योतिर्लिंगों के स्थान पर परंपराएँ अलग हैं: वैद्यनाथ के लिए परली वैजनाथ (महाराष्ट्र) भी माना जाता है — स्तोत्र में "परल्यां" शब्द इसी ओर इशारा करता है; और नागेश्वर के लिए औंढा नागनाथ (महाराष्ट्र) व जागेश्वर (उत्तराखंड) के दावे भी हैं। ऊपर सबसे प्रचलित स्थान दिए हैं।
मुख्य त्योहार और व्रत
- महाशिवरात्रि — फाल्गुन मास की कृष्ण चतुर्दशी (अमांत पंचांग में इसे माघ कृष्ण चतुर्दशी कहते हैं); रात भर जागरण और चार प्रहर की पूजा।
- सावन (श्रावण) मास — पूरे महीने शिव-पूजा, सावन के सोमवार और कांवड़ यात्रा।
- प्रदोष व्रत — हर पक्ष की त्रयोदशी को, शाम के समय।
- सोमवार — सप्ताह में शिव का दिन।
- कार्तिक पूर्णिमा (त्रिपुरारी पूर्णिमा) — शिव द्वारा त्रिपुरासुर पर विजय की स्मृति।
मंत्र और आरती
- ॐ जय शिव ओंकारा — आरती
- महामृत्युंजय मंत्र — अर्थ सहित
- पंचाक्षर मंत्र: ॐ नमः शिवाय — सबसे सरल और प्रिय शिव मंत्र, जो यजुर्वेद के श्रीरुद्रम् से आता है।
ज्योतिर्लिंगों के अलावा कुछ प्रसिद्ध शिव मंदिर
- अमरनाथ गुफा — अनंतनाग ज़िला, जम्मू-कश्मीर।
- लिंगराज मंदिर — भुवनेश्वर, ओडिशा।
- बृहदेश्वर मंदिर — तंजावुर, तमिलनाडु।
- नटराज मंदिर — चिदंबरम, तमिलनाडु।
- अरुणाचलेश्वर मंदिर — तिरुवन्नामलाई, तमिलनाडु।
- तुंगनाथ — रुद्रप्रयाग ज़िला, उत्तराखंड (पंच केदार में एक)।
सरल सीख
शिव हमें सिखाते हैं कि सादगी में शक्ति है। जिनके पास पूरा ब्रह्मांड है, वे भस्म और बाघंबर में खुश हैं। सच्चा भाव हो तो जल की एक धारा भी उन तक पहुँचती है।
आगे पढ़ें: ॐ जय शिव ओंकारा — शिव जी की आरती (पूरे बोल और अर्थ), महामृत्युंजय मंत्र — शब्दार्थ, भावार्थ और जप विधि, समुद्र मंथन की कथा — चौदह रत्न, माँ लक्ष्मी और नीलकंठ महादेव, श्री गणेश — परिचय, नाम, स्वरूप का अर्थ, कथाएँ और प्रसिद्ध मंदिर